तू क्या लगती थी हमारी ??
जो आज सबको इतना दुःख दे गयी,
सबकी आँखों में आंसू की बूँदें दे गयी,
दिल तो भरना चहिये उन लोगो का,
जिनको देश सँभालने की गद्दिया दी हुई हैं..
तू क्या लगती थी हमारी ??
जो आज देश को एक सीख दे गयी..
सीखना तो उनको चहिये जो देश का कानून बनाते हैं..
तू क्या लगती थी हमारी ??
जो देश को जगा गयी..
जागना तो उनको चहिये जो पैसो की भूख में देश को बर्बाद कर रहे है..
तू क्या लगती थी हमारी ??
जो देश के लोगो के दिलो में अपना बसेरा बना गयी ..
दिल तो उन लोगो के पास होना चहिये था जिन्होंने अब तक तेरे मुजरिमों को फांसी नही दी..
तू क्या लगती थी हमारी ??
जो देश के युवाओ को अपनी हवस पे काबू रखने का सन्देश दे गयी..
हवस तो उन भेडियो की खत्म करनी चहिये थी,
जिन्होंने तुझ जैसी मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया..
तू क्या लगती थी हमारी ??
जो आज देश के लोगो को कड़कती ठण्ड में रोड पे लिटाने को मजबूर कर गयी ..
लेटना तो उन कुत्तो को था जिसने तेरे साथ ऐसी हरक़त करी..
तू क्या लगती थी हमारी??
जो देश को सोचने पे मजबूर कर गयी..
सोचना तो उन संसद में बैठे नेताओ को चहिये था,
जिन्होंने देश की कानून व्यवस्था का हाल बेहाल कर रखा हैं..
तू क्या लगती थी हमारी??
जो देश में लोगो पे डंडे और ठन्डे पानी बोछारे सेहन करने पे मजबूर कर गयी..
एक बार उन लोगो पे भी बरस जाते डंडे और
पानी की बोछारे जो कैमरे पे आ के ब्यान दे जाते हैं..
तू लगती क्या थी हमारी ??
जो आज मुझको ये सब कहने पे मजबूर कर गयी..
तू मेरी देश की सबसे बहादुर लड़की थी..
जो आज मेरे देश में हर एक इंसान को आंसू की बूँदें दे गयी..
ये आग भले ही कुछ दिनों तक रहेगी .
लेकिन तेरी इस कुर्बानियत ने देश को आज सोचने पे मजबूर कर दिया हैं
