माँ, बस यही देख रहा हूँ ,
जब से पैदा हुआ हूँ, बस तुझे ही देख रहा हूँ ,
जब तेरी गोदी में था , भूख से रोता था तो तू अपने आंचल में मुझे छुपा कर दूध पिला देती थी,
तू कुछ खाती थी या नहीं , ये मुझे कैसे पता होगा , लेकिन तू मुझे भूखा नहीं सुलाती थी ,
जब तेरी गोदी से उतरा मैं माँ , तो तू अपनी ऊँगली पकड़ के चलना सिखाती थी ,
गिरता था कई दफ़ा, लेकिन फिर मुझे अपने पैरो पर खड़ा करना सिखाती थी,
जब नींद नहीं आती थी , तब लोरी गाके सुलाती थी,
माँ, बस यही देख रहा हूँ ,
जब पहली बार बोलने की इच्छा हुई तो सिर्फ तुझे ही पुकारा मैंने,
फिर चलना सीखा तेरे ही हाथो का सहारा लेकर ,
चलते चलते थोडा बड़ा हुआ , तो स्कूल तक तू ही मुझे छोड़ आती थी ,
जब भी लौट कर घर मैं आता , पहले मुझे ही खाना खिलाती थी,
गर्मियों में तेरे आंचल से मुझे सर को ढकना.., सर्दियों में मुझे ठण्ड न लगे , मुझे सीने से लगा के सोना ,
ये सिलसा कुछ सालो तक ऐसे ही चलता रहा , तब तक जब मैं खुद को बड़ा मानने लग गया ,
लेकिन तू फिर भी दोस्त की तरह मुझे समझाती थी,
तेरी बातों को मैं सुनता नही था , तेरी हर बात को मैं गुस्से में जवाब दे जाता था ,
लेकिन फिर भी तू मेरे गुस्से को भूल कर , मुझे अपने सीने से लगाती थी ,
जब भी मैं बीमार होता तो बस तू ही मेरा ध्यान रख पाती,
माँ, बस यही देख रहा हूँ ,
वक़्त ने थोड़ी और करवट ली , मैं कॉलेज जाने लगा ,
जब हॉस्टल में अच्छा खाने को नहीं मिलता था, तेरे हाथ की बनी रोटी बहुत याद आती थी ,
जब भी घर आता था तो बस तू ही मेरे पसंद का खाना बनाकर तैयार रखती थी ,
जब भी वापिस जाता तो तेरे हाथ के बने लड्डू छुपा छुपा के खाता था ,
जिस दिन तुझसे फ़ोन पर बातें नहीं होती थी , बस मन में एक बेचैनी सी आ जाती थी ,
तेरी आवाज़ मीलो दूर सुन कर भी ज़िन्दगी सवर सी जाती थी ,
हर परीक्षा से पहले तुझसे आशीर्वाद लेना , आज भी मुझे याद हैं ..
तू मेरे बिना घर का सूनापन भी सह जाती थी ,
माँ, बस यही देख रहा हूँ ,
फिर जब मैं नौकरी करने लगा , नए लोगो से मिलने लगा , फिर तुझसे दूर शहर में चला गया ..
मुझे देखने के लिए तेरी आंखें तरस जाती थी , लेकिन फिर भी मेरी तरक्की के लिए तू दुआ मांगती ,
शहर में अकेले कैसे होगा गुज़ारा मेरा , तुझे इस बात की फिकर भी सताती रही,
जब भी खाने की और देखता तो सोचता , माँ होती तो उससे कह कर कुछ फरमाइश करते ,
माँ से कह कर कभी परांठे बनवा लेते ,
माँ से बस कुछ खाने की इच्छा रखते तो , माँ खुद ही मेरी पसंद का खाना बना देती ,
इस बाहर के खाने में वो बात कहाँ , जो तेरे हाथ की सूखी रोटी में भी आ जाता ,
बस अब सोचता हूँ की तेरे पास फिर लौट आऊ.. लेकिन जिंदगी में पैसा कमाने की भाग दौड़ में खो गया हूँ ,
मन तो मेरा भी करता हैं तेरे साथ बैठ कर तेरी बातों को सुनूँ.. तेरे दुःख को दूर करू..
माँ बस यही देख रहा हूँ ,
कि अब तुझे मेरी शादी की चिंता सताने लगी थी , तूने मेरी पसंद की लड़की से शादी की हाँ भी कर दी थी ,
बहु को तूने वो सब सिखाना शुरू कर दिया , जो तुझे विरासत में मिला हैं ,
मैं ये भी देख रहा हूँ की तू अपनी बहु के ताने सुनकर भी चुप रहती थी , अकेले में रो लेती थी ,
रात दिन तू हमारी सेवा में लगी रहती थी , लेकिन आज तक तूने कभी मुझे परेशानी नहीं होने दी ..
तेरी दादी बनने की ख़ुशी को बस देख सकता हूँ , मेरे बच्चो को उनकी माँ से ज्यादा तू ही संभालती हैं ..
माँ बस यही देख रहा हूँ ,
कि अब तू बूढी हो चली थी , तुझमे अब वो हिम्मत नहीं थी ,
तेरे घुटने तेरा साथ नहीं देते .. लेकिन फिर भी तू अपनी परवाह किये बिना मेरा ख्याल रखती थी
तेरी यादाश्त कमज़ोर हो चली थी , फिर भी तू मेरे बच्चों को कहानिया सुनाती हैं ..उनको खुश करती थी ..
तुझे मेरे सहारे की जरूरत थी , लेकिन मैंने तुझे घर से निकाल दिया ..
लेकिन फिर भी मेरी ख़ुशी के लिए तूने वो फैंसला भी मान लिया था ..
माँ बस मैं देख ही रहा हूँ ..
अब तू मुझे छोड़ के जा चुकी हैं ..
तेरी आंखें मेरे लिए तरस रही थी और मैं अपने परिवार कारोबार में व्यस्त था,
जब मुझे तेरे हाथो को थामना था , तब मैं एक लोगो के फैलाये भ्रम में जी रहा था ,
मेरे पास तेरे लिए वक़्त नहीं था .. अभी तो तुझसे बातें हुई कितनी थी ..
माँ बस देख रहा हूँ ..
रो रहा हूँ..
इससे पहले के वक़्त अपनी करवट बदले , अपने माँ बाप को थोडा वक़्त दे. उनको तुम्हारे वक़्त की जरूरत हैं,
कहीं किसी दिन देर हो जाये .. फिर मैं और आप दोनों ही देखते रह जायेंगे .. मातृ दिवस की शुभकामनाएं..
हैप्पी मदर्स डे
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