ज़िंदगी जीने के लिए तीन जरुरी चीज़े होती हैं रोटी कपडा और मकान | इसमें से एक हैं शरीर को ढकने के लिए कपडे | जब भी कोई त्यौहार आता हैं या फिर कोई ख़ुशी का दिन तो हम सब की एक इच्छा रहती हैं मन में की नए कपडे लिए जाएं.. कुछ समय बाद जब उन्ही कपड़ो को बार बार उपयोग कर लिया जाता हैं तो वो कपडे पहनने में शर्म सी महसूस होती हैं |
आखिर इन पुराने कपड़ो का किया क्या जाये? कभी किसी रस्ते से गुजरते हैं तो कोई भिखारी नज़र आ जाता हैं जिसके शरीर पर कपडे नाम की वस्तु होती ही नहीं अगर दिख भी जाती ह तो वो भी फटी हुई अवस्था में… कभी सर्दी की रातो में छोटी सी झुग्गी बनाके रह रहे परिवार को देखो.. ठण्ड में शरीर ठठुरते रहते हैं..बिना कपड़ो के ठण्ड में मौत हो जाती हैं.. खाना ना मिलना तो दूर की बात हैं.. उन लोगो के लिए त्यौहार मनाना तो दूर अपनी जान बचाना मुश्किल हो जाता हैं |
ये तो हुआ पहला कदम जो हर इंसान जिसको ईश्वर ने इतना काबिल बनाया हैं की दुसरो की मदद अपने पुराने वस्त्र दान देके ही कर सकता हैं.. अगर दान देने में शर्म आये तो पुराने कपड़ो को आज कल कुछ मेहनती लोग अपने परिश्रम से दोबारा उपयोग में लानी वाली वस्तुओ का निर्माण कर देते हैं |
जिससे उनका रोज़गार भी बनता हैं और आपको आपके पुराने कपड़ो का कुछ उचित मूल्य या फिर कोई वस्तु मिल जाती हैं…अमेरिका, चीन जैसे शक्तिशाली देश में पुराने कपड़ो से थैलो, कारपेट, गद्दे के आलावा और भी दैनिक काम में उपयोग आने वाली वस्तुओ का निर्माण करते हैं|
लेकिन भारत जैसे देश में अभी भी हम इनका उपयोग करने की बजाए फेंक देते हैं| सोचने की बात ये हैं क्या हम और आप मिलकर अपने इन पुराने कपड़ो को दान नहीं दे सकते? सोचना तो आपको हैं की या तो आप उन पुराने कपड़ो को फायदा किस तरह ले सकते हैं| किसी जरूरतमंद को दान देके जो दुआ और पुण्य मिलेगा या फिर निर्स्वार्थ भाव से उस व्यक्ति को जो उसका पुनर्निर्माण करके अलग अलग वस्तु बेचकर अपनी रोज़ी रोटी कमाता हैं|
