15 अगस्त 1947 एक ऐसा दिन जिसको सुनकर सब लोग ख़ुशी से झूम उठते हैं , क्योकि इसी दिन हम आज़ाद हुए थे, हमारा देश उन अंग्रेज चोरो,लूटेरो,हत्यारों,नपुंसक,कायरो के हाथों आज़ाद हुआ था,अब आज़ाद हुए हम सबको 65 साल हो गये हैं,लेकिन सवाल ये उठता हैं की हम 15 अगस्त को क्यों मानते हैं? हम क्यों हर जगह सभाए करते हैं? हम क्यों हर स्कूल में इस दिन को उत्साह से मानते हैं? क्यों उन आज़ादी के सच्चे वीरो को याद करते हैं जो 15 अगस्त 1947 तक देश को आज़ाद करवाने के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर गये? क्यों हम लाल किले पर झंडा फहराते हैं? सरकारी दफ्तर वाले छुट्टी मानते हैं? आखिर क्यों?
जब हम लोग उन देश के वीरो का जो सपना था भारत देश के लोगो को एकजुट देखना ,सामाजिक बुराइयों से मुक्त भारत देखने का वो तोह पूरा नही कर पाए तोह फिर ये आज़ादी का जश्न क्यों? आज हम आज़ाद हैं पता हैं किसलिए आज़ाद हैं हम,लोग? मैं बताता हूँ की हम लोग किसलिए आज़ाद हैं.
1.हम आज़ाद हैं अपने देश में दंगे फैलाने के लिए.
2.हम आज़ाद हैं अपने देश में गुंडा गर्दी करने के लिए.
3.हम आज़ाद हैं अपने देश में नेता बनकर लोगो का पैसा लूटने के लिए.
ये तो बस आज़ादी का मेन लक्ष्य था हम तोह आज़ादी से और भी बहुत कुछ कर सकते हैं.जैसे की:
4.हम आज़ाद हैं आज देश में गरीब लोगो का पैसा खाने के लिए, “भ्रष्टाचार” फैलाने के लिए.
5.हम आज़ाद हैं किसी भी इंसान को सरेआम गोली मारने के लिए.
6.हम आज़ाद हैं सरेआम एक लड़की का बलात्कार करने के लिए.
7 हम आज़ाद हैं 20-20 लोगो का झुण्ड एक मासूम लड़की को भूखे भेडियो की तरह नोचने के लिए.
8.हम आज़ाद हैं अपने माँ बाप को घर से बेघर करने के लिए.
9.हम आज़ाद हैं परीक्षा में पास न करने पर अपने गुरु का क़त्ल करने के लिए.
10.हम आज़ाद हैं मेडिकल स्टोर को बंद करके हर कोने पे शराब के ठेके खोलने के लिए.
हम सब जिम्मेदार हैं क्योकि हम सब आज़ाद हैं.
कोई इस देश में 2000 करोड़ का घर बनवाता हैं तो कोई एक वक़्त की रोटी भी नही खा पाता,
देश की गद्दी सँभालने वाले देश को इतना लूट चुके हैं की इतना तो वो कायर अंग्रेज भी नही लूट कर ले गये.
इस देश में कोई एक घोटाला हो तो बताओ.बिना घोटाले के तो इस देश को आज़ादी मिली हो यकीन ही नही करेगा कोई,घोटालो का भी क्या कहना कुछ घोटाले तोह इस देश की सेना की सुरक्षा को लेकर हुए,कुछ घोटाले देश में टेक्नोलोजी को लेकर हुए,कुछ तो देश में खेल के आयों तक में हो गये,हसने की बात तोह ये हैं पशुओ के चारे को लेकर भी घोटाले कर डाले इस देश के नेताओं ने.कोई 5000 करोड़ खा गया,कोई 28000 करोड़ अकेले निगल गया ,एक तो इतना भूखा था वो तोह अकेला 1,76000 करोड़ अकेले ही निगल गया,वह रे पैसो के भूखो.
ये तो थी अपने देश के लूटेरो की बात.अब ज़रा असली आतंकवादियों का भी सुन लो ना जाने कितने आये और गये.इस देश को बमबो से फोड़ते गये पर आज तक देश को तोड़ नही पाए.लेकिन मज़े की बात तो ये हैं की जब ये लोग पकड़ में आये तो इनकी तो बदहाल जिंदगी में मौज ही हो गयी,आतंकवादियों की सेवा में भी हम पीछे नही हैं अतिथि देवो भव: वाली परंपरा इन के साथ भी चलती आ रही हैं,इन लोगो की सुरक्षा में इतना पैसा लग जाता हैं जितने में 10 गाँव का उद्धार हो जाये.
इन आतंकवादियों के लिए स्पेशल चिक्कन ,बिरयानी और ना जाने क्या क्या दिया जाता हैं और देश में सड़ने वाला अनाज वो भी गरीबो को मुफ्त में नही दिया जाता.देश के लोग भूखे सोये लेकिन हमको तो आज़ादी हैं उस अनाज को सड़ने देने की लोग तो खाए या नही उनसे हमको क्या?
इस देश में गरीबी की फिकर नही हैं.इन सब के आलावा हमें और भी आज़ादी मिली हैं जैसे
11.हम आज़ाद हैं अपनी राष्ट्रीय भाषा हिंदी बोलने वालो लोगो की बेज्जती करने के लिए,
12.हम आज़ाद हैं इस देश में फर्जी लोगो को नागरिकता देने के लिए ताकि वो वोट दे सके.
13.हम आज़ाद हैं इस देश में धर्म के नाम पर लोगो से वोटो की भीख मांगने के लिए,
14.हम आज़ाद हैं धर्म के नाम पर मूर्ख बनकर वोट देने के लिए.
देश का धर्म तो हम लोग भूल ही गये हैं, जिस धर्म को हम लोगो ने एक साथ होकर 65 साल पहले पाया था वो आज फिर से उसी गुलामी के अँधेरे में खो गया हैं.
धर्म के बाद जातियों के नाम पर भी हम लोगो ने डिग्री ले रखी हैं.सबसे ज्यादा आज़ादी तो इस फील्ड में मिली हैं,इस देश को जाति के नाम पे वोट लेने का माध्यम बना रखा हैं,छोटी जात वाले को तो अछूत समझा जाता हैं.हाथ मिलाने या गले लगने से हम छोटे नही हो जाते.छोटी जात वाला इंसान भी सदियों से जो खुद को छोटी जात वाला बताता आ रहा हैं वो भी ये भूल गया हैं की वो भी एक इंसान हैं भारतीय हैं.जहाँ सबको बराबर अधिकार हैं फिर भी ये जात पात.कोई खुद को दलित नेता बोलता हैं और दलितों का वोट पाके उन्ही को ठगता हैं.और बाद में अपनी मूर्तिया बनवाके करोड़ रुपये बर्बाद कर जाता हैं.दलितों को बर्बाद बनाने का काम भी इन्ही लोगो का ही हैं जो देश के गद्दार हैं.
अभी तो और भी आज़ादी हैं दोस्तों.ये भी पद ली जाये तोह आपका जीवन धन्य हो जायेगा
15.हम आज़ाद हैं अपने लोगो का खून बहाने को,कोई बेटा माँ को मार डालता हैं तो कोई बाप अपने बेटे को ,बच्चो को.अपनी बीवी को,और फिर खुद भी मार जाता हैं.
16.हम आज़ाद हैं इस देश में जहाँ औरत के रूप में देवियों की मूर्तिया बनाकर उनको पूजा जाता हैं और लड़की पैदा होने पे उसी औरत को मार दिया जाता हैं.
इतनी आज़ादी तो पा ली हैं हमने अब बचा ही क्या हैं आज़ादी के लिए?
कोई कहता हैं ओलम्पिक में देश गोल्ड क्यों नही जीतता उनको ये नही पता की हमरे इस देश में इतनी आज़ादी हैं इस आज़ादी में ही हमने गोल्ड मेडल जीते हैं.लेकिन अच्छी इंसानियत में बहुत पिछड़ गये हैं.चलो अब आपको इतनी बड़ी आज़ादी की मुबारक तो देने दो.सबसे बड़ी आज़ादी तो ये मिली की मैं अपने विचार जो एक सचाई हैं इस सामाज की वो आप सबको बता सकता हूँ.स्वतंत्रता दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनाये
जय हिंद,
जय भारत,
भारत माता की जय,
आपका मित्र
अंकित आर्य

