आतंकवाद – पठानकोट हमला
जब हम लोग नए साल के जश्न में डूबे हुए थे और अपने परिवार, दोस्तों के साथ घूमने के प्लान बनाने में व्यस्त थे | 2 जनवरी की सुबह करीब 3:30 बजे पाकिस्तान और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसी आई.एस.आई के साथ वहां के आतंकवादियों ने भारत की सीमा में घुस के देश के वीर जवानो को शहीद करने की योजना तैयार की हुई थी | जब पूरा देश सो रहा था , तब इन कायर लोगो ने हमारे देश के वायु सेना के एयरबेस पर हमला कर दिया | लेकिन ये कायर लोग ये भूल जाते हैं की हमारे देश पे अटैक करने से ये अपनी मौत को ही बुलावा देते हैं और हुआ भी वही | 60 घंटे करीब चले इस मुठभेड़ में देश के 7 जवान शहीद हो गये लेकिन सब आतंकवादियों को खत्म करने के बाद | नमन हैं उनकी आत्मा को स्वर्ण भारत की ओर से | क्या हर वक़्त नमन ओर कुछ दिन देश के वीरो की शाहदत पे आंसू बहाने से ये आतंकवादी रुक जायेंगे? हम सभी का जवाब होगा नहीं, बिलकुल नहीं |
जब तक हमारे देश की सरकार और सभी विपक्ष के साथ साथ मीडिया के लोग आतंकवाद के लिए एकजुट एक सुर में अपनी आवाज़ बुलंद नहीं करेंगे तब तक इन कायरो के होंसले बुलंद रहेंगे |
हमारी सरकार को हमारे पडोसी देश पाकिस्तान जो की एक मुख्य क्षेत्र हैं आतंकवादी के पैदा होने का और हमारे देश में घुसपैठ का जिम्मेदार रहा हैं बहुत सालो से लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये | अब वक़्त हैं की भारत सरकार को इस देश के खिलाफ कोई कड़े कदम उठाने के साथ साथ देश के सिस्टम में आतंकवाद को लेके कानून बनाने चाहिए | मीडिया का रोल होना चाहिए की वो ऐसे वक़्त में ब्रेकिंग न्यूज़ ना बना कर देश को एकजुट होने की कोशिश वाली खबरों का प्रसारण करे | और काम से काम ऐसे नेताओ या लोगो की प्रतिक्रिया ना ले जो सिर्फ वोट को ध्यान में रखते हैं देश को नहीं |
जब पेरिस पर अटैक हुआ तो वहां की मीडिया ने सीरिया के लोगो से बैठ के डिबेट नहीं की और न ही वहां के विपक्ष के नेताओ ने सरकर की आलोचना की और एक भारतीय मीडिया हैं जो पाकिस्तान के अधिकारी लोगो को बिठा के हमारे देश की ही बुराई में लगे हुए हैं और यहाँ के नेता जो रात दिन सरकार के ऊपर ही इस्तीफे देने का दबाव बना कर अपनी राजनीतिक रोटिया सेकने में लग गए हैं | और यहाँ तक कुछ देश के लोग ही अपनी सरकार और फ़ौज को मीडिया साइट्स पर अपशब्दों का इस्तेमाल का उनका मजाक उड़ाया जा रहा हैं |
क्या इस वक़्त देश को जोड़ने की बात होनी चाहिए या फिर पूरे संसार को दिखाना चाहिए की हम कितने कमजोर हैं? क्या ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने के चक्कर में मीडिया इतना गिर सकता हैं ?
आखिर में यही सवाल उठता हैं कि क्या इस तरह से हम स्वर्ण भारत का निर्माण करेंगे?
जब देश पर हमले होते हैं तो कोई देश के प्रधानमंत्री को गाली देता हैं तो कोई अपनी राजनीतिक रोटियां सेकता हैं, या कुछ लोग जो हिन्दू मुस्लिम एकता का रोना रोते हैं वो ऐसे समय पर मीडिया से गायब हो जाते हैं , या कुछ ऐसे लोग जो हर बात पर खुद को सही बताते हैं और दूसरेपर आरोप लगते हैं और लोगो से सिर्फ वोट मांगते हैं ..दुःख तो इस बात का होता हैं की इन कुछ मुट्ठी भर के लोगो की वजह से देश के लोग अपनी अपनी सोच बना लेते हैं और एकजुट नहीं हो पाते |

