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बूढ़े माँ बाप भाग-1

क्या कभी मन में ये ख्याल आया की बूढ़े होने पे कैसे ज़िंदगी गुजरेगी? 

कभी मन में ये ख्याल आया की आज जो हाथ पैर अच्छे से चल फिर रहे हैं कल को एक दम से चलना बंद हो जाये तब क्या होगा? शरीर का अंदरुनी हिस्सा जब बेवक़्त की बीमारिया ले आएगा तो कैसा एहसास होगा?  नही ! कभी नही!! ये ख्याल अभी हम नौजवानो के मन में आ ही नही सकता | अभी तो हम जवान हैं ज़िंदगी के उस पड़ाव पे हैं अभी, जिसमे सबसे ज्यादा शक्ति होती हैं इस शरीर में | कहावते ये कहती हैं जो जवानी में शरीर को अच्छा बना लेता हैं वो बुढ़ापे में दुःख नही भोगता | लेकिन बात यहाँ शरीर को सेहतमंद या तंदरुस्त रखने की नही कर रहा हूँ मैं | मैं तो यहाँ मुद्दा उठा रहा हूँ उन लोगो का जिन्होंने हम नौजवानो को जन्म देके इस जवानी को ख़ुशी से जीने का कष्ट उठाया | शुरुआत हमारे जन्म लेने से ही हो जाती हैं उनके एक एक क़र्ज़ की जो हम पे जवानी तक, कभी कभी तो हमारे जीने के आखिरी क्षण तक रहता हैं | 

 

हाँ मैं उन्ही की ही बात कर रहा हूँ जो हमारे जन्मदाता हैं | हमारे माँ बाप , मम्मी डैडी, बाऊ जी , लाला जी, पापा जी, माता जी, पिता जी, अब्बा अम्मी, डैड मॉम, हम सब इन्ही नाम से ही तो उनको बुलाते आये हैं कभी उनके नाम लेने की जरूरत भी नही करते | माँ जब जन्म देती हैं तब वो इतनी पीड़ा सहन करती हैं, जो शायद आप सोच भी नहीं सकते , वो पीड़ा एक माँ ही समझती हैं. किसके लिए? आपको दुनिया में लाने के लिए. चाहे बेटा हो या बेटी वो ये नही देखती की कौन हैं? उसको तो बस अपनी संतान के पैदा होने की ख़ुशी होती हैं जिसको वो 9 महीने से अपने पेट में पाल रही होती हैं |फिर उस बाप को सबसे ज्यादा ख़ुशी होती हैं, जो तुम्हे अपनी गोद में लेने के लिए बेकरार सा रहता हैं , जैसे ज़िंदगी की सबसे बड़ी पूँजी (कमाई)आप ही हो | 

कुछ महीने गुजरते हैं..आप न तो चल पाते हो , न बोल पाते हो, लेकिन माँ बाप समझते हैं की आपको क्या चाहिए | वो आपका हर वक़्त हर पल ख्याल रखते हैं कुछ कमी नही रखते | फिर कुछ वक़्त गुजरता हैं, आप चलने लगते हो स्वस्थ रहते हो .. माँ बाप फूले नही समाते | आप स्कूल जाने लगते हो..माँ बाप सपने पिरोने लगते हैं जब आप उनसे मीठी मीठी बातें करते हो. मैं डॉक्टर बनूँगा, मैं पायलट बनूँगा, मैं ये करूँगा, मैं वो करूँगा | माँ बाप इन्ही बातों को सचाई समझ कर दिन रात एक करके पैसा कमाने लग जाते हैं जिनसे तुम्हारे सपनो को पूरा किया जा सके | फिर आप स्कूल के बाद कॉलेज जाते हो उन सपनो को पूरा करने के लिए.. माँ बाप तुम्हारे लिए हर हफ्ते,महीने नए कपडे दिलवाते हैं , तुम्हे स्कूटर, गाडी या जो भी इच्छा होती हैं सब पूरी कर देते हैं.. ताकि तुम्हे कोई कमी नही आये , तुम अपने बाकी दोस्तों के आगे नीचे ना महसूस कर सको, तुम खुश रहो | फिर आप पैसा कमाने के लिए नौकरी ढूंढ़ते हो, जब नौकरी नही लगती तो यही बाप अपने दफ्तर में या अपने दोस्तों में तुम्हारे लिए अपना सर झुका देता हैं | नौकरी लग जाने के बाद माँ सुबह तुम्हारा खाना , दोपहर का खाना बना के देती हैं कपडे साफ़ सुथरे देती हैं | आप अब उसी पड़ाव पे आ गए जो मैंने ऊपर बताया था “जवानी” | 

 

अब वो माँ बाप बूढ़े हो चले हैं | उनके शरीर में वो ताकत नहीं रही जो तुम्हारे जन्म के समय हुआ करती थी | अब वो ज़िंदगी के उस मुकाम पे आ चुके हैं जहाँ उनको तुम्हारी उतनी जरूरत हैं  जितनी उन्होंने तुम्हे तुम्हारे पैदा होने से लेके आज तक की | आज कल की पीढ़ी या पहले की भी हो कुछ टाइम ,माँ बाप के बूढ़ा होने पे उनको अपने घर से निकाल देती हैं | लड़का हो या लड़की जब तक उनको उनसे जरुरत रहती हैं तब तक वो अपने साथ रखने को तैयार रहते हैं लेकिन जब माँ बाप का शरीर जवाब देना शुरू हो जाता हैं तब भाई-भाई या भाई-बहन आपस में इस बात पे झगड़ा शुरू कर देते हैं की मैं क्यों रखूं ? कभी कोई बेटा अपनी पत्नी की बात में आकर अपने बूढ़े माँ बाप को निकाल देता हैं तो कभी कोई इसलिए निकाल देता हैं की मैं सेवा कैसा करूँगा? कभी कोई अपने बच्चो की बातों में आकर की उनको दादा दादी अच्छी बातों के लिए टोकते हैं इसलिए वो बच्चे भी निकाल देते हैं | निकाले क्यों न जब माँ बाप ही ऐसे हो तो उन बच्चो को भी वही शिक्षा मिली | 

 

लेकिन हम लोग ये क्यों भूल जाते हैं की जो हम अपने माँ बाप या सास ससुर के साथ कर रहे हैं, कल को हमारे बच्चे भी वही हमारे साथ करेंगे ही करेंगे | हम अपने बेटा बेटी को ये शिक्षा क्यों दे रहे की इंसान बूढ़ा हो जाने पर उसकी घर में कोई जगह नही होती? पहले तो ये कहा जाता था की लड़के माँ बाप को छोड़ देते हैं लेकिन आज कल लडकिया भी अपने फायदे लेकर माँ बाप को बेघर कर देती हैं |बहुओ का नाम पहले से ही ख़राब हैं जो सचाई हैं | इसमें गलती माँ बाप की भी होती हैं.. वो अपने बेटा बेटी के मोह में इतना फंस जाते हैं की वो हर बात मानने लगते हैं उनकी , बिना अपने भविष्य पे ध्यान दिए | ये समस्या भारत में रोज़ इतनी तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं जिसका कोई इलाज नही दिख रहा हैं| 

आखिर ऐसा क्यों? हमारे भारतीय समाज में दया इंसानियत कहाँ खोती जा रही हैं? माँ बाप को बेघर करने का रिवाज़ सा चल पड़ा हैं हिन्दुस्तान में | हम ये क्यों भूल जाते हैं की माँ बाप जिन्होंने हमको चलना, बोलना, जीना, कमाना सिखाया ..और आज सब ये चीज़े उन्ही को लौटानी हैं उनके बुढ़ापे में ..तो हम उनको घर में ही नही रखना चाहते हैं? सोचना पड़ेगा ..ये जवानी को इसी तरह अगर गवा दिया तो बुढ़ापे में इससे भी बुरे दिन देखने को मिलेंगे | जैसा हम अपने माँ बाप के साथ करेंगे उससे ज्यादा हमको भी मिलना हैं | मैं इसी से जुडी हुई कुछ कहानियाँ आपके लिए लिखूंगा जो आपने मन पे प्रभाव डालेंगी. आपको सोचने पे मजबूर करेंगी.. ऐसा मेरा विश्वास हैं.. माँ बाप की सेवा नहीं कर सकते तो कम से कम घर से मत निकालो , सबसे पहला कर्म तो यही हैं.. यही सन्देश हैं मेरा हम सभी भारत नौ जवानो को | जय हिन्द| 

 

 

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