देश को तो आज़ादी तब मिल गयी थी लेकिन अब जो देश को बांटने वाले गद्दार लोगो से आज़ादी कब मिलेगी ? असली मुद्दा देश का यही हैं अब की हम लोग कब तक ग़ुलामी करेंगे ? अंग्रेजो से तो मुक्ति मिल ही गयी थी लेकिन जो सपने उन वीर देशभक्तो के थे वो आज के इस भारत में दूर दूर तक नही नज़र आते | आज़ादी मिली थी एकजुट होने से ना की किसी की जात, धर्म या अमीरी गरीबी को पूछ कर | आज के समाज में अभी तक हम लोग इस एकजुट होने को लेकर ही लड़ते रहते हैं | इस बार आज़ादी का विषय मेरे लिए यही था की हम लोग एकजुट होने की भावना को अपने अंदर लेके आये | बीते दिनों हमारे देश में एक अजीब सी आज़ादी की लहर दौड़ पड़ी , वो भी हमारे देश के एक राज्य को देश से अलग करने को लेकर | और यहाँ पर भी देश के कुछ लोग अलग अलग हिस्सो में खुद तो बटे ही हुए थे और दुसरो को भी बांटने का प्रयास चल रहा था | मानो हमारे देश के लोगो की सोच सिर्फ और सिर्फ कुछ लोग ही अपने हाथो नियंत्रित करते हैं |

जो भारतवर्ष हज़ारो सालो से सबसे शांत और सहिष्णु देश था , जिसको सिर्फ और सिर्फ लूटा गया उस भारत देश में अचानक ही असहिष्णुता का प्रचार होने लग गया वो भी उन लोगो की तरफ से जिन लोगो ने देश में सिर्फ और सिर्फ राजनीति की और अपनी जाति के वोट के लिए देश के राज्यो का बंटाधार कर दिया | कुछ नेताओ , मीडिया चैनल , क्षेत्रीय लोगो की वजह से ही इस देश में साम्प्रदायिकता ,दंगे फसाद हो रहें हैं और देश की एकजुटता का बंटाधार कर रखा हैं | दुःख की बात तो यही हैं की भारत की जनता को सब सच दिखाई देता हैं लेकिन फिर भी सब अंदर ही अंदर चुप हैं | गुस्सा करते भी हैं तो सोशल मीडिया साइट्स पर जहाँ पर पहले से ही उन गद्दार लोगो का बसेरा बना पड़ा हैं | जब रास्ते में दो अजनबी लोग भिड़ते हैं और दूसरे को चोट लग जाती हैं तो ये नेता, मीडिया वाले , क्षेत्रीय लोग उसको धर्म और जाति में बाँट कर देश में इनटॉलेरेंस का गन्दा खेल खेलते हैं और लोगो के बीच मनमुटाव बढ़ाने का प्रयास करते हैं |
दूसरी तरफ देश में आतंकवादियो को हीरो बनाने वाले भी मौजूद हैं जो देश के क्रांतिकारियो को आज के इन आतंकवादियो से तुलना करने की भी जरूरत कर लेते हैं | क्या करें आज़ादी तो खैरात में मिली हैं जो हमारे संविधान में लिख गए थे उस बात का गलत फायदा उठाया जा रहा हैं | ऊपर से हमारे सरकार में रहने वाले लोग ऐसे लोगो के खिलाफ सख्त कारवाई क्यों नहीं करते इस बात का अफ़सोस भी रहता हैं | मतलब कुछ भी करना हैं लेकिन देश में अपने स्वार्थ के लिए देश की एकजुटता को तोड़ने का प्रयास करना हैं | वो तो हम अभी इतने भी नही टूटे की उन देशभक्तो के बलिदानो को आज के इन सड़कछाप लोगो की घटिया कोशिशो को पूरी होने दे | दुःख को इस बात का होता हैं की ये हमारे देश का खाते हैं और हमारे ही देश को तोड़ने का प्रयास करते हैं | इस स्वतंत्रा दिवस मेरी लोगो से यही प्राथना हैं की देश को फिर से ऐसे लोगो की वजह से मत बांटने दो जो धर्म, जाति को लेकर आपसे साथ मांगे | आवश्यकता हैं तो हम लोगो को ऐसे लोगो को सबक सिखाने की | एकजुट हैं तभी भारत हैं …
